इटावा : इटावा जंक्शन से वन विभाग और कानपुर एसटीएफ की संयुक्त टीम ने मंगलवार दोपहर मृत कछुओं कैलोपी (कवच) की तस्करी करने वाली एक महिला समेत दो तस्करों को पकड़ा है। पकड़े गए तस्कर रिश्ते में देवर-भाभी हैं। यह दोनों कालका एक्सप्रेस से कछुए की कैलोपी को बंगाल ले जाने की तैयारी में थे। इनके पास से बरामद हुए तीन बैगों से 36 किलो कैलोपी बरामद हुई है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों में बताई जा रही है। इनके विरुद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम सहित अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इटावा से कछुआ कैलोपी तस्करी होने की सूचना पर प्रभागीय वानिकी निदेशक अतुल कांत शुक्ला के नेतृत्व में वन विभाग एवं कानपुर एसटीएफ इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह सेंगर की टीम ने संयुक्त रूप दोपहर साढ़े 12 बजे इटावा जंक्शन पर छापामारी की। प्लेटफार्म नंबर तीन पर कालका एक्सप्रेस ट्रेन के इंतजार में बैठी राजेन्द्री देवी पत्नी स्व़ श्रीकृष्ण एवं उसके देवर जगदीश पुत्र वंशीलाल निवासीगण कोकपुरा थाना फ्रेंड्स कालोनी को टीम ने घेराबंदी कर पकड़ लिया।

वह कोलकाता इसे बेचने के लिए जा रहे थे। जिसे वह चार हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। इससे पहले दो बार वह लोग तस्करी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कछुओं की कैलोपी को वह मध्य प्रदेश, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा एवं मैनपुरी जिलों के शिकारियों से खरीदते थे।

डीएफओ अतुल कांत शुक्ला ने बताया कि कैलोपी का शक्तिवर्धक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। तस्कर कछुआ को मारने के बाद उसका कवच उतारते हैं। उसकी खाल नहीं होती है। जिसके बाद मांस को उबाल कर चिप्स की तरह तैयार करते हैं, जिन्हें बंगाल और कोलकाता में दवा बनाने वालों को यह लोग बेचते हैं। उन्होंने बताया कि इन दोनों पर विभागीय कार्रवाई के साथ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई भी कराई जाएगी।

सोसायटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के महासचिव राजीव चौहान ने बताया कि शक्तिरोधक दवा बनाने में प्रयोग होने के कारण कछुआ कैलोपी की अंतरराष्ट्रीय कीमत दो से ढाई लाख रुपये प्रति किलो है। कैलोपी बनाने में मुलायम कछुओं का प्रयोग होता है जो कि निलसोनिया गैंगटिक्स, निलसोनिया ह्यूरम एवं चित्रा इंडिया प्रजाति के कछुआ का बनता है।

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