आजमगढ़ जिले के तहबरपुर ब्लाक के ददरा भगवानपुर गांव निवासी वरिष्ठ साहित्यकार कवि व गीतकार रुद्रनाथ चौबे रुद्र जी का ग्राम पंचायत ददरा भगवानपुर के पंचायत हाल में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम प्रतिनिधियों तथा ग्रामवासियों द्वारा भव्य नागरिक अभिनन्दन किया गया । सर्व प्रथम आइडल जनर्लिस्ट असोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव संजय पान्डेय व ग्रामप्रधान के द्वारा माँ शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्ज्वलित किया गया ।

कवि रुद्र जी ने मंचासीन मुख्य अतिथियों संजय पान्डेय जी, अध्यक्ष हरिहर यादव व विशिष्ट अतिथि साहित्याचार्य चन्द्रभान चौबे को माला, अंगवस्त्रम, डायरी और अपनी तीनों पुस्तकें प्रदान किया । तत्पश्चात कविवर रुद्र जी का साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए नागरिक अभिनन्दन करके ग्राम गौरव सम्मान से सम्मानित करने का उपक्रम आरंभ हुआ । हाल में उपस्थित विशाल जन समूह के समक्ष प्रख्यात पत्रकार व कवि संजय पान्डेय एवं ग्राम प्रधान श्री हरिहर यादव ने रुद्र जी का माल्यार्पण करते हुए उन्हें अंगवस्त्रम के साथ ही ग्राम गौरव प्रशस्तिपत्र देकर विभूषित किया ।

इसके बाद संयोजक अंशुमान उपाध्याय, साहित्याचार्य चन्द्रभान चौबे , श्रीरामलीला समिति ददरा भगवान पुर के प्रबन्धक देवप्रकाश लाल, श्रीगोबिन्द चौबे, डाक्टर रामकेश चौबे, सुनील चौबे पिन्टू, , श्यामत चौबे, आलोक कुमार चतुर्वेदी, दीपक चौबे, विनोद यादव, अनिल कुमार लाल , , सुमित चौबे, पंकज चौबे, डाक्टर रवीन्द्र नाथ चौबे, सूर्यकान्त चौबे इत्यादि भारी संख्या में क्षेत्रवासियों ने रुद्र जी का माल्यार्पण किया। संजय पान्डेय ने रुद्र जी को लाजवाब साहित्यकार बताया । संतोष चौबे जी ने कहा कि हम सभी नवयुवक गण कला, गीत व संगीत के क्षेत्र में आदरणीय रुद्र जी के पद चिन्हों पर चलकर ही यहाँ तक पहुँचे हैं।
समारोह के दूसरे हिस्से में सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन हुआ।


जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बालेदीन बेसहारा तथा संचालन कवि देवेन्द्र तिवारी देव ने किया।
कवयित्री अनीता राज, सरोज यादव, सिम्पल सिंह, अंजू राय, रुद्र नाथ चौबे, कवि राकेश पाण्डेय सागर, लाल बहादुर चौरसिया, कवि घनश्याम यादव प्रथम व द्वितीय, बैजनाथ गंवार, विजय प्रताप बूढ़नपुरी, महेंद्र मृदुल, शायर ताज आज़मी, राकेश प्रताप दूबे, राजनाथ यादव, आदि लब्धप्रतिष्ठ कवियों ने अपनी-अपनी उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत करके जनता जनार्दन का मन मोह लिया और खूब तालियाँ बटोरीं,
अंत में रूद्रनाथ चौबे जी ने सभी प्रति आभार ज्ञापित किया और इसी के साथ यह भव्य समारोह संपन्न हो गया।

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