बागपत। जुनून और जज्बा हर मुश्किल काम को आसान कर देता है। राइफल लूट एवं सिपाही की हत्या के चर्चित मामले में नामजद अमित कुमार ने कानून की पढ़ाई कर अदालत में अपना केस खुद लड़ा। नतीजा अदालत ने उनको दोषमुक्त कर दिया। ग्राम किरठल निवासी अमित कुमार मेरठ के शास्त्रीनगर में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के निकट रहते हैं। उन्होंने बताया कि जनपद शामली के थानाभवन क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके कुख्यात सुमित कैल गिरोह ने वर्ष 2011 में पुलिसकर्मियों पर हमला कर सर्विस राइफल लूट ली थी। सिपाही कृष्णपाल की मौत और सिपाही अमित घायल हो गए थे। उस समय वह अपनी रिश्तेदारी में ग्राम कैल शिकारपुर गए हुए थे। इस केस में उनको नामजद कर दिया गया था। उस समय वह बीए के छात्र थे।  पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा तथा रासुका की कार्रवाई की थी। 862 दिन जेल में गुजारने पड़े। जेल में ही मन में ठान ली थी कि खुद को निर्दोष साबित करके दिखाना है। जमानत पर जेल से छूटने के बाद लोग ताने देते थे। उन्हें नजरअंदाज किया। दोबारा से पढ़ाई शुरू कर वर्ष 2015 में बीए उत्तीर्ण किया। हरियाणा के गुरुग्राम में जाकर एक अधिवक्ता के पास मुंशी के रूप में कार्य किया। शाम को मार्केट में कैलेंडर बेचकर अपना खर्च वहन किया। बाद में मेरठ पहुंचकर वर्ष 2018 में एलएलबी व 2020 में एलएलएम उत्तीर्ण किया। मुजफ्फरनगर की अदालत में अपने खिलाफ दर्ज केस खुद लड़ा। आखिरकार अदालत ने उनको दोषमुक्त किया।

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