पटना। देश के चार स्थानों पर श्री हनुमान जी महाराज के बाल स्वरूप स्थापित हैं। उनमें एक स्वरूप मच्छरहट्टा गली में स्थापित है। श्री काले हनुमान जी महाराज के विग्रह की आभा व मुख मंडल से भक्तों को ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि वह स्वयं भक्तों का इंतजार कर रहे हों। श्री काले हनुमान जी महाराज की प्रतिमा के निकट ही श्रीराम दरबार, शिवलिंग व भगवती की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर के अग्र भाग में प्राचीन पीपल का पेड़ है।

मंदिर के इतिहास के संबंध में पुजारी राजेश मिश्र ने मंगलवार को बताया कि लगभग 300 वर्ष से पहले यहां के निवासी नुन्नु गुरु की मां को रात में स्वप्न आया कि पीपल के वृक्ष के सटे कुआं में हनुमान जी का विग्रह है। सपना के बाद जब कुआं की खुदाई हुई तो श्री काले हनुमान की प्रतिमा निकली। पुजारी ने बताया कि कुआं खुदाई के क्रम में उनकी पूंछ में फावड़ा लग जाने के कारण कई दिनों तक खून रिसता रहा। उसके बाद नुन्नू गुरु की मां को फिर सपना आया कि कटे हुए स्थान पर दूब व हल्दी का लेप करने पर सब ठीक हो जाएगा। भक्तों द्वारा कटे हुए स्थान पर दूब व हल्दी का लेप लगाने के बाद खून रिसना बंद हो गया। पुजारी राजेश मिश्र बताते हैं कि लगभग 300 वर्ष से यहां बाल स्वरूप श्री काले हनुमान जी महाराज की पूजा विधि-विधान पूर्वक होती आ रही है। जो भी भक्त श्री काले हनुमान जी महाराज के समक्ष सच्चे दिल से अर्जी लगाता है उसकी तुरंत सुनवाई होती है। मंगलवार को लड्डू व पेड़ा तथा शनिवार को चना व गुड़ के साथ पूजा की जाती है।

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